नीरू मेरे घर से दो घर छोड़ कर रहती थी, उसका और मेरा अफेयर उसकी शादी से पहले से था लेकिन उसके साथ सेक्स का आनंद ही दूसरा होता था, नीरू शादी के बाद अपने घर आने वाली थी उसके कोई भाई नहीं था तो उसके पापा ने मेरे पापा से कहा “अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो भाई की जगह मोनू लेने चला जाए नीरू को उसके ससुराल से” तो मेरे पापा ने जवाब दिया “हाँ हाँ बिलकुल, आखिर पड़ोसी भी तो परिवार की तरह ही होते हैं”. मैं मन ही मन हंस रहा था साला आज मुझे अपनी ही नीरू का भाई बना रहे हैं जिसके जिस्म को मैंने खिला के फूल बनाया है, वैसे मन ही मन मुझे मज़ा भी आ रहा था क्यूंकि नीरू को लेने जाने के बहाने उसकी शादी के बाद उसके साथ ये मेरा पहला सेक्स था.

मैं नीरु के ससुराल पहुंचा तो उसके ससुराल वालों ने नीरू के भाई की तरह ही मेरी खूब आवभगत की और नीरू तो मुझे देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी और अलग ही मूड में थी, नीरू का पति मुझे बाज़ार घुमाने ले गया और शाम को हम दोनों को वहां से विदा दी. मैं जान बूझ कर अपनी कार ले कर गया था ताकि मुझे नीरू के साथ अच्छा वक़्त गुज़ारने को मिले और हुआ भी यही, जैसे ही मैं और नीरू उसके शहर की सीमा से बाहर निकले मैंने गाड़ी हाईवे से उतार कर पेड़ों के एक झुरमुट में ले ली और हम दोनों नए एक दुसरे को कसकर गले लगा लिया आखिर इतने दिनों से एक दुसरे के जिस्म की प्यास हमें इतना तडपा जो रही थी. नीरू ने कहा “सब कुछ यहीं कार में मत कर लेना”  तो मैंने कहा “तुम मेरी जान चिंता मत करो मैंने सब इंतज़ाम कर रखा है, रस्ते में मेरे दोस्त का होटल है वहां पर एक मस्त कमरा बुक है हमारे लिए पहले से ही”.

नीरू खुश हो गयी और हम दोनों वहां से रवाना हो कर मेरे दोस्त के होटल में पहुंचे जहाँ कमरे में पहुँचते ही नीरू मेरी छाती से चिपक गयी और बोली “जब शादी हो रही थी तो मुझे लगा था कि अब कैसे क्या मैनेज हो पायेगा लेकिन तुम मेरे चितचोर इतने कमीने निकलोगे सोचा नहीं था” मैं हंसकर कहा “मेरी जान मैं तुम्हारी जवानी का मज़ा लेने के लिए कुछ भी करूँगा”. अब तो मैं और नीरू रुक ही नहीं रहे थे हम दोनों ने जंगली हो कर एक दुसरे के कपडे उतारना शुरू कर दिया, मैंने नीरू से कपडे उतारते उतारे पूछा “तो कैसा लगा नया नया लंड” वो हंसी और बोली “छोटा था तो दर्द कम हुआ” हम दोनों हंस पड़े और मैंने माला के चूचों में मुंह लगा दिया और उन्हें जी भर के पीने लगा. नीरू ने कहा “उफफ्फ्फ्फ़ मेरे राज्जा तुम्हारे टच से ही मेरी हालत ख़राब हो जाती है और ये जो तुम मेरे चुचे पीते हो ये तो कमाल है”.

मैं मन ही मन खुश हुआ और नीरू से बोला “जान आज बडे दिन हुए तुम्हे किसी सेक्सी पोज़ में चोदे हुए” तो नीरू नए कहा “रुको मेरी जान मेरे बेवक़ूफ़ पति नए मुझे एक नई लौन्ज्री गिफ्ट की है वही पहन कर आती हों”. नीरू वाकई उस लौन्जरी में सेक्सी लग रही थी और मेरे लंड नए उसे देखते ही सलामी दे दी और उछलने लगा, ये देख कर नीरू खिलखिला कर हंस पड़ी और बोली “तो मेरे राजा के लौड़े को चूत चाहिए” और ये कहकर नीरू ने मेरे लंड को अपने मुंह  में ले लिया और हिला हिला कर चूसने लगी. मैंने कहा “तुम चुटक इ कह रही थी तो मुंह मिएँ क्यूँ लिया” तो बोली “इसका टेस्ट जो इतना पसंद है मुझे, एक तुम्हारा लंड है जिसपर बाल नहीं बदबू नहीं सिर्फ प्यार ही प्यार है और एक उसका साला गंदा छी”.

नीरू ने मेरे लंड को क्या तरीके से चूसा कि मज़ा ही आ गया और जब वो मेरे लंड को चूस रही थी तो मैं सिक्सटी नाइन की पोजीशन में उसकी चूत में अपनी ऊँगली और जीभ पेल रहा था, नीरू की चूत हमेशा जल्दी ही गर्म हो कर पनिया जाती थी तो मैंने तुरंत उसे घोड़ी बनाया और उसकी फेवरेट पोजीशन में उसे चोदने लगा, नीरू हमेशा कहती थी “मैं तुम्हारी कुतिया हूँ तो मुझे कुतिया की तरह ही चोदा करो ना”. नीरू चुदने में पहले इतनी एक्सपर्ट नहीं थी लेकिन मैंने उसे ब्लू फिल्मे दिखा दिखा कर हर तरह से चुदना सिखा दिया और अब वो जवानी में मेरे हर तरह से काम आ रही थी, मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदते हुए उसके बेहतरीन नर्म चूचों को सहलाया और दबाया भी अच्छे तरह से क्यूंकि यही तो उसे और उत्तेजित करने का स्टाइल था और वो झड़ गयी लेकिन मैं खड़ा रहा.

मैं नीरू से बोला “मेरी जान तुम्हारे दुल्हे नए तुम्हारी गांड नहीं मारी” तो उसने कहा नहीं वो तो चूत में दो बार घुसा और बस झड़ के निकल लिया, और वैसे भी उसके लंड से नहीं मैं तुम्हारे लंड से ही गांड मर्वाउंगी कहा तो था”. बस फिर क्या था मैंने उसकी चूत में से अपना लंड निकाला और अपनी उँगलियों से उसकी चूत का थोडा पानी उसकी गांड में अच्छे से ऊँगली पेल पेल के मला और अपना धीर धुरंधर लंड घुसा ही दिया नीरू की गांड में तो वो दर्द से बिलबिला उठी. मैंने उसका दर्द समझते हुए नाईट स्टैंड पर पड़े उसके बैग में से लोशन निकाल कर उसकी गांड और अपने लंड पर लगा कर फिर से लंड पेला और धक्के लगाने शुरू किए तो नीरू की जान हलकान हो गयी, मेरा बस झड़ने ही वाला था तो आखिरी धक्के के साथ मैंने अपना माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया.

नीरू निढाल हुई औंधे मुंह ही लेट गई और मैं भी पास ही लेट गया, थोड़ी देर बाद जाग कर हमने खाना आर्डर किया लेकिन कहना जब तक आया हमने एक और ट्रिप मारी और फिर निकलने से पहले जब फ्रेश होने लगे तो एक और बबार मैंने नीरू की नयी नवेली शादीशुदा चूत का भोग लगाया. मैं और नीरू अक्सर ऐसे ही चुदाई किया करते हैं और अब तो उसने मेरे शहर के पास वाले कॉलेज में ही जॉब ज्वाइन कर ली है जो की हाईवे पर है, सो हम दोनों अपने अपने घरों से अप डाउन करते हैं और फिर उसी हाईवे होटल में एक दुसरे के जिस्म पर अप दवों करते हैं.