हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रोहित है और में बहुत जवान सुंदर लड़का हूँ. में दिखने में बहुत मस्त आकर्षक लगता हूँ और अभी मैंने अपनी बी.ए. की पढ़ाई को पूरा किया है. में आज आप सभी को अपनी चचेरी बहन श्वेता के साथ हुई उसकी जबरदस्त चुदाई के बारे में पूरी तरह विस्तार से बताने जा रहा हूँ, जिसमें मैंने उसके कहने पर उसकी चुदाई के मज़े लिए और में उम्मीद करता हूँ कि मेरी पिछली कहानी की तरह आप सभी को मेरी यह कहानी भी जरुर पसंद आएगी.

दोस्तों मेरा नाम रोहित है और में 23 साल का हूँ और मेरी चचेरी बहन का नाम श्वेता है और वो 22 साल की है और उसका फिगर तो ऐसा है कि पूछो मत. वो बहुत ही सुंदर है, जिसको देखकर कोई भी पहली बार में उसका दीवाना हो जाए और वो एकदम गोरी, उसके लंबे काले बाल, उसकी लम्बाई करीब 5.5 और उसके फिगर का आकार 36-25-38 है. उसका फिगर बहुत मस्त उभरा हुआ है और जब वो मटक मटककर चलती तो में उसके कूल्हों को देखकर अपने लंड को सहलाने लगता.

दोस्तों यह घटना उस समय की है, जब हम दोनों भाई बहन हमारे घर से बाहर आगरा में एक ही रूम में रहकर अपनी अपनी पढ़ाई कर थे और हम दोनों उस समय अपनी जवानी के उस पहले दौर से गुजर रहे थे और हम अभी अभी जवान हुए थे, इसलिए हम जोश से पूरे भरे हुए थे और हम दोनों को सेक्स करने की बहुत जरूरत महसूस होने लगी थी, इसलिए मैंने हमारे रूम में पढ़ने के लिए कुछ सेक्सी कहानियों की नंगे चित्र वाली किताबें रखी हुई थी, जिनको में हर कभी सही मौका देखकर अपनी बहन से छुप छुपकर पढ़कर मुठ मारकर अपने लंड को शांत किया करता था और मुझे ऐसा करने में बड़ा मज़ा आता था, उसका मुझे पता नहीं था कि वो अपनी चूत को कैसे शांत करती थी.

लेकिन वो मुझसे पिछले कुछ दिनों में कुछ ज्यादा करीब आने लगी थी और मुझे बाद में पता चला कि उसको मेरी सेक्सी किताबों को पढ़कर मेरे बारे में सब कुछ पता चल चुका था और वो मेरे साथ इसलिए ऐसा व्यहवार करने लगी थी.

एक दिन मेरी एक छोटी सी गलती की वजह से श्वेता के हाथ वो किताब लग गई, जिसको उसने पढ़कर बहुत मज़े लिए और इसलिए वो अपनी चूत की प्यास और में अपने लंड की भूख को नहीं रोक सके और धीरे धीरे वो मेरे बहुत करीब होती चली गई और हमारे बीच हम दोनों की मर्जी से वो काम होने लगा और में उसको चूमने लगा, लेकिन उसने मेरा कभी कोई भी विरोध नहीं किया और मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ने लगी थी. दोस्तों में उसके बूब्स को कपड़ो के ऊपर से ही दबाकर उसके मज़े लेने लगा था, वो मेरी एक गर्लफ्रेंड बन गई थी, जिसका हम दोनों ने बहुत मज़े लेकर पूरा फायदा उठाना शुरू किया और एक दिन की बात है, में उसको किस करते हुए उसके कपड़ो के अंदर हाथ डालकर उसके गोरे मुलायम बूब्स की निप्पल को मसल रहा था और वो उस समय मेरी बाहों में थी.

तभी वो मुझसे बोली की में ही तुम्हारी असली पत्नी बन जाती हूँ और तुम आज से मुझे अपनी पत्नी समझो और मेरे साथ जमकर सेक्स करो. दोस्तों वो उस समय जींस, शर्ट में थी और वो मुझसे बोली कि चलो तुम शुरू हो जाओ और इतना कहकर उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया और वो मेरे होंठो को बहुत बुरी तरह से चूसने चूमने लगी और में भी पूरी तरह से जोश में आ चुका था और में भी उसको किस करने लगा और में उसको अपनी बाहों में लेकर दबाने लगा और में बिल्कुल पागलों की तरह उसके साथ यह सब कर रहा था और कुछ देर बाद उसको मैंने खींचकर बेड पर लेटा दिया और में तुरंत उसके ऊपर आ गया और मैंने उसको चूमने के साथ साथ उसके बूब्स को दबाना भी शुरू कर दिया.

करीब दस मिनट तक में उसको लगातार चूमता रहा और फिर मैंने उसका जोश देखकर उसकी शर्ट को खोल दिया, जिसकी वजह से वो मेरे सामने ब्रा में थी, लेकिन मैंने ज्यादा देर ना करते हुए तुरंत उसकी ब्रा को भी खोल दिया और जैसे ही मैंने उसकी ब्रा को खोला. फिर मैंने देखा कि उसके बड़े आकार के दोनों बूब्स उछलकर बाहर आ गये, जिसको में अपनी चकित नजरो से कुछ देर घूरकर देखता रहा और उसके बाद में उसके दोनों बूब्स को पागलों की तरह दबाने उसकी निप्पल को निचोड़ने लगा.

में मन ही मन में सोचता रहा कि आज कितने दिनों के बाद मुझे इसके पूरे के पूरे बूब्स बिना कपड़ो के देखने को और दबाने को मिले है और मेरा वो सपना आज पूरा हो गया, जिसको में बहुत दिनों से देख रहा था.

फिर मैंने ज्यादा देर ना करते हुए झट से उसकी हल्के भूरे रंग की निप्पल को अपने मुहं में रख लिया और में उसको चूसने लगा और वो लगातार अपने मुहं से आहहह्ह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ कर रही थी. में उसके बूब्स को तब भी चूसता ही रहा और मुझे उसके साथ ऐसा करने में बहुत मज़ा जोश आ रहा था और वो गरम होकर आहें भरने लगी और ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी.

तभी थोड़ी देर बाद मैंने उसकी जींस को भी खोलकर उसको अपने सामने पेंटी में कर दिया. फिर मैंने नीचे उसकी चूत की तरफ देखा और महसूस किया कि उसकी चूत बहुत गरम हो गई थी, जिसकी वजह से उसकी पेंटी चूत वाले हिस्से से पूरी गीली हो चुकी थी.

मैंने उसकी पेंटी को भी उतारकर में उसकी सुंदर कामुक रसभरी चूत को कुछ देर अपनी प्यार भरी नजर से देखता रहा और वो बहुत सुंदर गुलाबी रंग की बड़ी ही कामुक दिखाई दे रही थी और फिर में कुछ देर बाद उसकी चूत को अपने एक हाथ से फैलाकर चाटने लगा और उसकी गुलाब जैसी पंखुड़ियों को अपनी जीभ से चाटकर उनके मज़े लेने लगा और वो सिसकियाँ भर रही थी, अह्ह्ह्हह्ह्ह आस्स्स्स्श कर रही थी.

वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर खींच रही थी और जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से दबा रही थी और फिर कुछ देर बाद श्वेता ने अपनी कमर को ऊपर उठा लिया और वो मेरे तने हुए लंड को अपनी दोनों जाँघो के बीच में लेकर धीरे धीरे रगड़ने लगी थी और वो मेरी तरफ करवट लेकर लेट गयी, जिससे कि मेरे लंड को वो ठीक तरह से अपनी मजबूत पकड़ से पकड़ सके और उस समय उसके निप्पल मेरे मुँह के बिल्कुल पास थे और में उन्हें कस कसकर दबा रहा था.

तभी अचानक से उसने अपने दूसरे बूब्स को जबरदस्ती मेरे मुँह में डालते हुए कहा कि चूसो इनको अपने मुँह में पूरा अंदर लेकर. मैंने उसके एक बूब्स को अपने मुँह में भर लिया और में उसको ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा और उसके साथ साथ में उसके दूसरे बूब्स की निप्पल को निचोड़ने लगा था और थोड़ी देर के लिए मैंने उसके बूब्स को अपने मुँह से बाहर निकाला और में उससे कहने लगा में हमेशा से तुम्हारे कसे हुए बूब्स को देखकर मन ही मन इनके बारे में सोचता था और में हमेशा बड़ा हैरान भी होता था और मुझे इनको छूने की हमेशा बहुत इच्छा होती थी और मेरा मन करता था कि में इन्हें अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दूँ और में इनका पूरा रस पी जाऊं, लेकिन में बहुत डरता था कि पता नहीं तुम क्या सोचो और कहीं तुम मुझसे नाराज़ ना हो जाओ और तुम नहीं जानती कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है? में कितना तरसा हूँ, इसको पाने के लिए और में तुम्हें बता नहीं सकता.

श्वेता कहने लगी कि अच्छा तो आज तुम अपनी एक एक इच्छा को पूरा कर लो और जी भरकर दबाओ, चूसो और मज़े लो, में तो आज से पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ और तुम आज मेरे साथ जैसा चाहे वैसा करो.

फिर क्या था दोस्तों? में श्वेता की तरफ से हरी झंडी को पाकर में श्वेता के बूब्स पर टूट पड़ा और मेरी जीभ उसके खड़े निप्पल को महसूस कर रही थी और मैंने अपनी जीभ को उसके उठे हुए खड़े निप्पल पर घुमाना शुरू किया और में उसके दोनों अनारों को कसकर पकड़े हुए था और में उनको बारी बारी से चूस भी रहा था, में ऐसे कसकर बूब्स को दबा भी रहा था, जैसे कि आज में उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूँगा और श्वेता भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और उसके मुहं से ओह्ह् सईईईई की आवाज़ निकल रही थी और वो मुझसे पूरी तरफ से सटे हुए मेरे लंड को बुरी तरह से मसल भी रही थी और मुठ भी मार रही थी.

उसने अपने एक पैर को मेरे दूसरे पैर के ऊपर चड़ा दिया और मेरे लंड को उसने अपनी दोनों जांघो के बीच में रख लिया, मुझे उसकी जांघो के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ. दोस्तों यह उसकी मुलायम चूत का असर था, क्योंकि श्वेता ने उस समय पेंटी नहीं पहन रखी थी और मेरे लंड का टोपा उसकी झांटो के बीच में घूम रहा था, लेकिन मेरा सब्र का बाँध टूट रहा था और मुझसे बिल्कुल भी रुका नहीं जा रहा था.

में श्वेता से बोला कि श्वेता मुझे कुछ हो रहा और उस वजह से में अपने आपे में नहीं हूँ, प्लीज़ मुझे बताओ में क्या करूं? तो श्वेता मुझसे कहने लगी कि करना क्या है, तुम मुझे चोदो, फाड़ डालो मेरी चूत को और आज तुम मेरी जमकर चुदाई करो, मुझे भी अपने लंड की चुदाई से खुश कर दो और मेरी चूत की आग को भी बुझा दो. में भी कब से तुम्हारे साथ अपनी चुदाई के सपने देख रही हूँ, चलो तुम शुरू हो जाओ.

में चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए उसके बूब्स को लगातार मसलता रहा और उस समय उसने अपना मुँह मेरे मुँह से बिल्कुल सटा दिया और वो मुझसे फुसफुसा कर बहुत धीमी आवाज में बोली कि तुम जल्दी से अपनी श्वेता को चोद दो, मुझे तुम कब तक ऐसे ही तरसाते तड़पाते रहोगे और उस समय श्वेता ने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के निशाने पर लगाकर उसको अंदर जाने का रास्ता दिखा रही थी और सही रास्ता मिलते ही मेरे लंड का टोपा मेरे एक ही हल्के से धक्के में अंदर चला गया और इससे पहले कि श्वेता संभले या वो अपना आसान बदले मैंने अपनी तरफ से उसको दूसरा एक जोरदार धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी मक्खन जैसी मुलायम चिकनी चूत की जन्नत में पहुंच चुका था.

श्वेता ज़ोर से चिल्ला पड़ी, उईईईईईईईई आईईईई माँ ऊहुहुहहह रोहित में मर गई, तुम ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नहीं और मुझे तुम्हारे लंड से बहुत ज़ोर से जलन दर्द हो रहा है, ऊह्ह्हह्ह तुम्हारा लंड बहुत मोटा है और मेरी चूत अभी छोटी है, तुमने आज मुझे मार ही डाला आईईई ऐसा दर्द मैंने कभी नहीं महसूस किया, तुमने यह क्या किया, में आज मर ही जाउंगी, प्लीज धीरे से करना.

दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि श्वेता को बहुत दर्द हो रहा था, क्योंकि तक उसकी चूत वर्जिन थी और आज पहली बार जो उसकी चूत में मेरा इतना मोटा और लंबा लंड में घुसा था और वो दर्द की वजह से अपनी दोनों जांघो को चिपकाकर मेरी कमर पर अपने नाखूनों से निशान कर रही थी, जिसकी वजह से मुझे भी जलन हो रही थी और में कुछ देर तक अपने लंड को उसकी चूत में डालकर चुपचाप ऐसे ही पड़ा हुआ था. तब मैंने महसूस किया कि श्वेता की चूत फड़क रही थी और वो अंदर ही अंदर मेरे लंड को मसल भी रही थी और तेज गति से चलती हुई सांसो की वजह से उसकी बार बार उठी छाती उसके बूब्स बहुत तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहे थे और वो बहुत आकर्षक नजर आ रहे थे. फिर मैंने तुरंत अपने हाथ आगे बढ़ाकर उसके दोनों बूब्स को पकड़ लिया और अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.

फिर मैंने महसूस किया कि श्वेता को दर्द से कुछ राहत मिली और उसने भी अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया और फिर उसने अपनी कमर को एक झटका देकर वो मुझसे कहने लगी आह्ह्हह् रोहित तुम मुझे ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदना शुरू करो, मेरी चूत को चोदकर पूरी तरह से शांत कर दो और उसके उस धक्के की वजह से मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर चला गया.

फिर श्वेता मुझसे बोली कि तुम इस लंड को मेरी चूत से बाहर निकालो, लेकिन में अपने लंड को धीरे धीरे श्वेता की चूत में अंदर बाहर करने लगा और उसी समय श्वेता ने मुझसे मेरे धक्को की स्पीड को बढ़ाकर करने को कहा और मैंने अपनी स्पीड को पहले से ज्यादा बढ़ा दिया और में और भी तेज़ी से अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा और श्वेता को भी पूरी तरह से मस्ती आ रही थी और वो जोश में आकर अपनी कमर को नीचे से उठा उठाकर मेरे हर एक धक्के का जवाब देने लगी थी.

उसने अपने रसीले बूब्स को मेरी छाती पर रगड़ते हुए अपने गुलाबी होंठो को मेरे होंठ पर रख दिए और मेरे मुँह में अपनी जीभ को डाल दिया और वो अपनी चूत में मेरा लंड समाए हुए तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी. दोस्तों मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे में सीधा जन्नत में पहुँच गया हूँ और फिर मैंने महसूस किया कि वो जैसे जैसे झड़ने के करीब आ रही थी, उसकी धक्को की रफ़्तार बढ़ती ही जा रही थी और पूरे कमरे में फ़च फ़च की आवाज़ गूँज रही थी और में श्वेता के ऊपर लेटकर धनाधन धक्के लगाने लगा और श्वेता ने अपने पैर को मेरी कमर पर रखकर मुझे ज़ोर से जकड़ लिया और वो ज़ोर ज़ोर से अपने कूल्हों को उठा उठाकर अपनी चुदाई में मेरा साथ देने लगी थी और में भी श्वेता के दोनों बूब्स को मसलते हुए लगातार धक्के लगा रहा था और पूरा कमरा हमारी चुदाई की आवाज़ से भरा पड़ा था और श्वेता अपनी कमर को हिलाकर अपने कूल्हों को उठा उठाकर मुझसे अपनी चुदाई रही थी और वो मुझसे बोले जा रही थी आअहहह्ह्ह्हह ऊओह्ह्ह्हह ऊऊहह्ह्ह्ह हाँ मेरे राजा, में मर गई रे हाँ ऐसे ही चोद रे मुझे उईईईईई में मर गईईरीईई माँ मेरी चूत फट गई, मेरी चुदाई जमकर शुरू करो चोदो मुझे और ले लो तुम आज पूरा मज़ा मेरी इस जवानी का मेरे राजा और वो अपनी गांड को भी हिलाने लगी. दोस्तों मैंने लगातार धक्के देते हुए उसको करीब तीस मिनट तक बहुत मज़े लेकर चोदा और में भी उससे बोल रहा था उफ्फ्फ्फ़ हाँ ले और ले मेरी रानी ले मेरा लंड अपनी ओखली में तूने मुझे बड़ा तड़पाया है, ले मेरी जान यह लंड तेरा है, अहहह्ह्ह क्या मस्त जन्नत का मज़ा आ रहा है, में तो तेरा गुलाम हो गया हूँ. श्वेता अपनी गांड को उछाल उछालकर मेरा लंड अपनी चूत में ले रही थी और में भी पूरे जोश के साथ उसके बूब्स को मसल मसलकर अपनी जान को चोदे जा रहा था, लेकिन श्वेता मुझको ललकार कर कहने लगी, हाँ लगाओ और ज़ोर से धक्के मारो मेरे राजा और में उसको जवाब देकर उससे कहता हाँ यह ले मेरी रानी ले ले अपनी चूत में.

फिर वो कहती हाँ ज़रा और ज़ोर से सरकाओ अपना लंड मेरी चूत में मेरे राजा, तब में कहता हाँ यह ले मेरी रानी यह लंड तो आज से बस तेरे लिए ही है. फिर वो कहने लगी उफफ्फ्फ्फ़ देखो मेरे राजा मेरी यह चूत तो आज तेरे लंड की दीवानी हो गयी है, हाँ और ज़ोर से और ज़ोर से आईईईई मेरे राजा में गई रे और यह बात कहते हुए मेरी श्वेता ने मुझको कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी चूत ने अपने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया.

मेरा भी लंड वीर्य छोड़ने वाला था और में उससे बोला कि में भी आया मेरी जान और फिर मैंने भी अपने लंड से वीर्य निकाल दिया और में हांफते हुए उसके बूब्स पर अपना सर रखकर उससे चिपककर लेट गया और उसके गोरे गरम सेक्सी बदन से खेलने लगा और हम दोनों एक दूसरे से बहुत देर तक ऐसे ही लिपटकर तब तक पड़े रहे, जब तक मेरा लंड उसकी चूत से अपने आप ठंडा होकर बाहर नहीं आया और उसके बाद हम दोनों उठकर बाथरूम में जाकर नहाए और अपने अपने बदन को साफ किया. तब मैंने उसकी तरफ देखकर महसूस किया कि वो बहुत खुश थी और मेरी चुदाई से पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रही थी.