हेल्लो फ्रेंड्स उम्मीद करता हूँ आप सभी इस रीडर रोज नयी नयी कहानिया पढ़कर अपनी सेक्स की आग को और हवा ददे रहे हो. सेक्सी कहानिया पढने से चुदाई की इच्छा इतनी बढ़ जाती हे की उस वक्त जो भी सामने मिले तो दिल करता हे उसे चोद दू. और एसे में ही लोग किसी भी रिश्ते की परवाह किये बिना सिर्फ चोदाई के बारे में ही सोंचते हे.

इस की कहानिया पुरे बदन में आग अलग द्देती हे. कहानिया पढ़ते वक्त लंड बड़ा हो जाता हे. लेकिन क्या कभी किसी ने सोंचा हे की इसकी साड़ी कहानिया सच्ची नहीं होती हे. ८०% कहानिया या तो फेक होती हे या फिर लिखने वालो की मन की चाहत जो पूरी तो नहीं होती बट सोच कर ही मुठ मार लेते हे. और लोगो को बताते हे की चुदाई हुई हे.

एसे फेक कहानियो को पहचानने के लिए बहुत तरीके हे. जेसे के लंड का १२ इंच या उसे ज्यादा बड़ा होना. हमेशा भैया या अंकल अपने वाइफ को सेतिस्फाय नहीं कर पाना. थोड़ी सी भाभियों की चोदाइयों को छेड़छाड़ करने पर ही भाभिया खुद ही चोदने को तैयार हो जाना और भैया का हफ्ते भर का बहार जाना और और ये तभी होना जब भाभी को चोदने की इच्छा होती हे. एनी वे में अपने बारे में बताता हूँ.

में मिस्टर सुमित दत्ता बंगाली लड़का हूँ. वेस्ट बंगाल के कोलकाता शहर का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र २९ इयर हे. में शादीसुदा हु मेरी बहुत ही अच्छी एक सुन्दर पत्नी हे. और मेरे ३ लड़के हे. में अपनी सेक्सिउअल लाइफ भी काफी एन्जॉय करता हूँ.

लेकिन बात वो बोलते हे न मर्द को जितनी भी चोदाई करने का मिल जाए उसकी चोद्ने की भूक कभी कम नहीं होती. मेरे साथ भी एसा ही हुआ. में भी चोदै करने का दीवाना हू.मेने भी अपनी पडोश की भाभियों को और अपनी तीन भाभियों को बड़े ही प्यार से चोदा हे. लेकिन कभी चीची वाले रिश्ते की दिवार को नहीं गिराया हे.सब की कहानियो में इस पे पोस्ट करूँगा अगर आप लोग मेरी कहानियो को सच्ची मानो तो पहले में अपनी एक पडोश की भाभी की चुदाई की कहानी [पोस्ट कर रहा हूँ. जिसे मेरी चोदने की इच्छा बचपन से थी. जो की अब पूरी हुई फेब्रुआरी महीने में भाभी इतनी सुन्दर तो नही थी.जो भी देखे उसका चोदने के लिए उसका लंड खड़ा हो जाए. लेकिन पता नहीं क्यों में उसे चोदना चाहता था.पहले तो वो दुबली पतली सी थी.

उसकी छोटी छोटी सी चुचिया मुझे काफी अच्छी लगती थी. लेकिन अब वो मोटी हो चुकी हे.और उसकी सरीर की काफी मसल दिखती हे मतलब अब तो और भी चुदैसी लगती हे. अब उसकी चुचिया भी बड़ी हो गयी हे बिलकुल गोल गोल. और हां मोटी औरतो की जुलती जुलती हुई चुचियो की तरह नहीं बल्कि बिलकुल टाइट. जेसा की आप लोग सोचते होंगे की भाभियों को चोदना काफी आसन होता हे एसा बिलकुल भी नही हे.अगर एसा होता रो में कब की भाभी को चोद देता.

लेकिन उसे चोदने का मौका मुझे मिलही गया. वो भी किस्मत से. पहले भी मेने कई बार भाभी साथ में बस में सफ़र किया लेकिन हर बार मेरी इच्छा सिर्फ चुचिया दबाने तक ही सीमित रह जाती. जब भी मेने  भाभी के सरह बसमे सफ़र किया वापसी का वक्त रात में बस में उसकी चुचियो का पूरा मज़ा लेता और भाभी कभी मुझे मन नहीं करती. लेकिन कभी भी अपनी चूत को छूने नहीं देती थी. लेकिन इस बार कुछ एसा हुआ की बस में सिट नहीं थी तो हमने स्लीपर लेना पड़ा. में तो खुस था पर भाभी थोड़ी अन्कंफरटेबल थी. खेर हम दोनों न्स में स्लीपर में चढ़ कर बेठ गए. मेने स्लीपर का दरवाजा बंद कर दिया और में लेट गया. भाभी बेठी हुई थी. नस चलने लगी बहार अँधेरा होने लगा था. में भाभी की पीठ पर अपना हाथ घुमा रहा था.

मुझे काफी मजा आ रहा था. और मेरा लंड चोदने को तैयार हो गया था. मेने भाभी को लेटने को कहा पर भाभी नहीं मानी लेकिन मेने उसे खीच कर उसे अपने साथ सुला लिया. लेकिन इसी खीचा तानी में उसकी साड़ी का पिन निकल गया. तो मेने कहा रहने दो ना भाभी. अब रात में इसे लगाकर क्या होगा. भाभी अब मेरे साथ लेट गयी. जेसा की में पहले भी उनकी चुचियो का बहोत मज़ा ले चूका था.तो में अपना हाथ उसकी चुचियो पर फेरने लगा. और भाभी मुझे एसा करने से कभी नही रोकी. और आज भी नहीं रोक रहीथी.

में धीरे धीरे भाभी के ब्लाउज का बटन खोलने लगा और उसकी नंगी चुचियो को दबाने लगा. भाभी हल्का हल्का ऊऊऊ आआअह्ह्ह्ह करने लगी थी. लेकिन में तो पुरे मुद में था. में अपने पेरो से भाभी की साडी को ऊपर खीचने लगा. ओर उसके पेरो को रगड़ने लगा. लेकिन जेसे ही मेने अपना हाथ उसकी साड़ी के अन्दर डाला और उसकी पेंटी को हाथ लगाया तो भाभी उठकर बेठ गयी. और मुझे रोकने लगी लेकिन आज में रुकना नहीं चाहता था.

मेने भाभी को बोला भाभी प्लीज् एसा मौका मुझे फिर कभी नहीं मिलेगा. तो प्लीज् आज मुझे मत रोको. लेकिन भाभी नहीं मान रही थी. लेकिन मेने भी ठान लिया था तो मेने उसकी जांगो को धीरे धीरे मसलने लगा भाभी कसमसा रही थी. मेने अपना हाथ धीरे से उसकी पेंटी में रखा तो पाया उसकी पेंटी न्हिग चुकी थी.में समज गया की भाभी गरम हो चुकी हे पैर वो मुझे चोदने देना नहीं चाह रही थी. मेने फिर घडी में टाइम देखा तो मेरे पास अभी और २ घंटे ही बचे थे. तो मेने अपना हाथ धीरे धीरे उसकी पेंटी में चूत के अन्दर रगड़ ने लगा. अब भाभी का बदन अकड रहा था. और वो मना भी नहीं म कर रही थी. में धीरे धीरे उसकी पेंटी को निचे खीचने लगा. और पेंटी को उतार दिया अब अपने हाथ से उसकी बालो भरी चूत को रगड़ ने लगा. ओह गोद उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी.

में अपनी ऊँगली से उसकी चूत को चोदने लगा. और भाभी हलकी आवाज़ के साथ ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह आआआहह्ह्ह्हह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ फ्फ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ह्ह्ह्हह करने लगी. मेने भी मौका देखा और अपनी पेंट उतार दी. और चड्डी भी मेरा लंड तो चोदने के लिए कबसे तैयार था ही में भाभी के ऊपर आ गया  ओर् अपना लंड भाभी की चूत में डाला. जेसे ही मेरा लंड भाभी की चूत में गया भाभी जोर से मुझे पकड़ लिया और सिस्कारिया भरने लगी.

मेने भी मौके का फायदा उठाते हुए भाभी की अच्छी तरह से चुदाई कर डाली.