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मालकिन की चुदाई देखी



दोस्तों, मेरा नाम राजू है और मेरी उम्र २० साल है और मैं नॉएडा में एक साहब के यहाँ नौकर हु. मुझे यहाँ पर मेरे चाचा ने लगवाया था. मेरा चाचा साहब के ऑफिस वाली बिल्डिंग में लिफ्टमेन है. जब पिछले साल मेरा चाचा गाँव गया था, तो मुझे भी अपने साथ ले आया था, काम पर लगवाने के लिए और फिर मैं साहब के यहाँ आ गया. मेरे पास कुछ ज्यादा काम तो नहीं था. सिर्फ मेम साहब की काम मद्दत और जब वो जॉब पर जाए, तो उनके पीछे घर की देखभाल. उनके कोई बच्चे नहीं है और सिर्फ वो दोनों ही रहते है. मेरे साहब और मेमसाहब दोनों फनलोविंग पर्सन है और दोनों ही अपनी जिन्दगी का पूरा लुत्फ़ उठाते है.

कहानी शुरू करने से पहले, मैं आपको अपने साहब और मेमसाहब के बारे में बता देता हु. साहब का नाम रजत है और मेमसाहब का नाम अंजली है. साहब की पर्सनालिटी बहुत अच्छी है उनका कद ६ फुट के भी ऊपर है. मेमसाहब भी बहुत ही सुंदर और गोरी है. उनके शरीर पर एक भी बाल नहीं है और एकदम चिकनी लाल – लाल. जब साहब घर पर नहीं होते है, तो मैंने पता नहीं कितनी ही बार उनको दरवाजे के कीहोल से कपड़े बदलते हुए देखा है. उनके नंगे चिकने जिस्म को देखते ही, मेरा लोडाएकदम से खड़ा हो जाता है और मुझे भाग कर अपने रूम में जाना पड़ता है और जब तक मैं मालकिन के नाम मुठ नहीं मार लेता, तब तक मेरा लोडा शांत नहीं होता है.

मैं जो बात आपको बता रहा हु, तो बहुत ज्यादा पुरानी नहीं है. एकदिन मैं बाज़ार गया हुआ और जब वापस आया, तो देखा कि साहब की गाड़ी पार्किंग में खड़ी थी. मैंने सोचा, पता नहीं क्या हुआ? क्योंकि कितना भी जरुरी काम हो, साहब दिन में घर वापस नहीं आते है. जब मैं दरवाजे पर पंहुचा, तो अन्दर से कुछ अजीब सी हलकी – हलकी कहराने की आवाज़े आ रही थी. मुझे लगा, कुछ गड़बड़ है, तो मैंने सामान साइड में रखा और जल्दी से कीहोल में से देखा. अन्दर का नज़ारा देख कर तो मेरी साँसे ही रुक गयी. अंजली मालकिन पूरी की पूरी नंगी सोफे पर पड़ी हुई थी और रजत साहब उनके ऊपर चड़े हुए, उनके होठो को चूस रहे थे और उसके मम्मो को मस्ती में दबा रहे थे. साहब भी पुरे नंगे थे और मेमसाहब ने उनका लंड पकड़ा हुआ था.

ये नज़ारा देखते ही, मेरा लंड तो निकर में ही फाटक से खड़ा हो गया और तड़पने लगा. मेमसाहब के गुलाबी गरम बदन को देख कर मेरे मुह से लार टपकने लगी. मैंने वहीं पर अपने लोडा को बाहर निकाल लिया और उसको जोर से बेदर्दी से दबाने लगा, बिलकुल वैसे ही, जैसे मेमसाहब साहब का लोडा दबा रही थी और खीच रही थी. मेमसाहब के मुह से अह्हहः अहहह्हा उम्म्म्मम्म य्म्मम्म्म्म आआआआ करके हलकी दर्द भरी सिसकिया निकल रही थी. साहब ने मेम साहब को आधा सोफे पर लिटाया था. साहब अब अपने घुटनों पर आ गए थे और मेमसाहब के मम्मो को अपने में जोर से दबाये हुए थे और उनके निप्पल को मस्ती में चूस रहे थे. उन्होंने उनके निप्पलो को अपने दांतों के बीच में दबाया हुआ था उसको जोर से खीच रहे थे.

मेमसाहब के मुह से तड़पन भरी आवाज़े निकल रही थी. मुझे तो देख ही इतना मज़ा आ रहा था. मेरा हाथ मेरे लोडा पर जोर से चल रहा था. कुछ देर साहब ने मेमसाहब के दोनों मम्मो को मस्त चूसा और पूरा का पूरा लाल कर दिया. उसके बाद वो अपनी जीभ से मेमसाहब के बदन को चाटने लगे. उनकी जीभ मेमसाहब की कमर, पेट और नाभि पर रेंग रही थी और मेमसाहब किसी नागिन की तरह बल खा रही थी. उसके शरीर किसी मछली की तरह मचल रहा था. साहब ने फिर उसके शरीर को उनकी जांघो को मजबूती से पकड़ा और अपनी जीभ को उनकी चूत पर रख दिया. उन्होंने पहले अपने होठो से एक जोर डा चुम्मा लिया और थोड़ा काट भी लिया. मेमसाहब ने साहब के बाल पकड़ कर खीच लिए और जोर से चिल्लाई आआआआईईईईईअऊऊऊऊऊ क्या कर रहे हो? मुझे दर्द होता है.. आआआआआअ मर गयी…

फिर साहब ने अपनी जीभ से उनकी चूत को चाटना शुरू किया. मेमसाहब ने अपने पेरो को हवा में लटका लिया था और उन्होंने साहब के बालो को कस कर पकड़ रखा था और जोरो से खीच रही थी. उनकी आवाज़ पुरे कमरे में गूंज रही थी अहः आहाह अहहाह अहः आआ हाहाहा ह्ह्ह्ह ह्म्म्म आआ हाहाह उम्म्म्म उम्म्म्म मर गयी.. मर गयी. इतने सालो में, तुमने मुझे मार डाला.. तुम बहुत हॉट हो रजत.. तुम भी कुछ कम नहीं हो अंजली.. तुम्हारे गरम जिस्म को देख कर मेरा लंड हमेशा ही तुम्हे चोदने को बेताब रहता है. वो दोनों एक दुसरे की तारीफ कर रहे थे और मैं इधर पागल हो रहा था. अब मैं अपने आपे में नहीं था और मेरे लोडा के अन्दर मुझ से कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. मैंने अपने लंड को जोर से दबाया और बहुत जोर से मुठ मारने लगा. मुझे लगा, कि आज तो मैं अपने लंड को खीचकर तोड़ ही दूंगा.

मैंने फिर से अन्दर देखना शुरू किया, तो मेमसाहब ने रजत साहब को धक्का दे दिया था और अब वो उनके ऊपर आ गयी थी और उनके लंड को उन्होंने अपने हाथ में लेकर सहलाना शुरू कर दिया था. वो मस्ती में उनके लंड सहला रही थी और फिर एकदम से उन्होंने अपनी जीभ उसके टोपे पर रख दी और उसको चाटने लगी. उनकी जीभ टोपे और लगते ही, साहब के मुह से सिसकी निकली आह्ह्हह्ह.. और फिर मेमसाहब ने एक ही बार में उनके लोडा अपने मुह में ले लिया और उसको चूसने लगी. उनके लंड से शायद कुछ – कुछ निकल रहा था, क्योंकी जब भी मेमसाहब लंड से मुह बाहर निकालती, उनकी चिपचिपी लार का मुह से लेकर लंड के मुह तक का पुल बन जाता. लगभग १५ मिनट की चुसाई के बाद, मेमसाहब साहब के दोनों ओर पैर करके बैठ गयी.

उन्होंने लंड को अपनी चूत पर लगाया. एक हाथ से उन्होंने लंड को सीधा पकड़ा और दुसरे साथ से अपनी चूत को खोला और फिर एक ही बार में, वो लंड के ऊपर धम्म्मम्म से बैठ गयी. साहब को तेज दर्द हुआ होगा और उनके मुह से आआआआआआअ आआआआआअ करके जोर से आवाज़ निकली. मेमसाहब ने एक हाथ से सोफे को पकड़ लिया और दुसरे हाथ से अपने बूब्स को दबाने लगी और जोर – जोर से उछलने लगी. मेमसाहब उछल तो अन्दर रही थी, लेकिन तड़पन मुझे अपने लंड पर हो रही थी. बहुत ही मजेदार और गरम था ये सीन. करीब २० मिनट तक, मेम साहब अपने बालो से खेलती रही और साहब के लंड को भेद रही थी. साहब भी अपने दोनों हाथो से उनके बूब्स दबा रहे थे. अचानक से मेमसाहब की स्पीड तेज हो गयी और वो एक जोर की आवाज़ के साथ साहब के ऊपर गिर गयी आआआआ…

कुछ देर वो ऐसी ही लेटी रही और साहब ने अपनी गांड को तेजी से ऊपर फेकना शुरू कर दिया. साहब ने मेमसाहब को बहुत कसकर पकड़ा हुआ था और उसकी गांड बहुत तेजी से ऊपर चल रही थी और उनका लंड बहुत तेजी से मेमसाहब की चूत में जा रहा था. अचानक से उनकी स्पीड तेज होने लगी और इधर मेरा हाथ भी मेरे लंड पर पूरा कस चूका था और मैं भी जोर – जोर मुठ मार रहा था. अब मैं अन्दर देखा रहा और मुठ मार रहा था. एकदम से उनकी आवाज़ निकली आआआआआआअ .. उनकी स्पीड हलकी कम होने लगी और इनकी गांड हिलनी हलकी हो गयी और वो एकदम से शांत हो गये. इधर मेरा मुठ में एक जोरदार झटके से आया और मैंने सारा का सारा जमीन पर गिरा दिया. मैंने अपने लंड को जमीन से रगड़कर अपना मुठ निकाला और फिर एक गंदे कपड़े से जमीन को साफ़ कर दिया.

फिर मैं अन्दर झांक कर देखा. अब तक साहब और मेमसाहब कपड़े पहन चुके थे और साहब ने मेमसाहब को अपने से चिपकाया और उनके होठो को अपने होठो में दबा लिया और चूमने लगे. मेमसाहब के मुह से अब भी हलकी सिसकिया निकल रहे थे और वो साहब के लंड को पेंट के ऊपर से ही दबा रही थी. अब मुझसे नहीं रुका गया और मैं खड़ा हुआ और मैंने अपने कपड़े ठीक किये और डोरबेल बजा दी. मैंने अपनी आखे झुक कर फिर से कीहोल से लगा ली और देखा, तो साहब ने उनको नहीं छोड़ा और जब उनके होठो पर बहुत जोर से काट लिया, तब जाकर कहीं उन्होंने छोड़ा. मेमसाहब से बोला – राजू होगा और भाग कर अपने कमरे में चली गयी. मैंने साहब को अपने तरफ आते देखा, तो एकदम से खड़ा हो गया और अन्दर चले गये.

मेमसाहब अन्दर से कपड़े ठीक कर के किचन में आई और सामान देखने लगी. मेरी नज़रे अभी भी उनकी चिकनी कमर और गांड पर फिसल रही थी. उन्होंने मुझे देखा, तो मुझ डांट दिया और मैं किचन से आकर अपने रूम में चले गया और फिर से उनके नाम की मुठ मारी. तो दोस्तों, ये मेरी कहानी है अपने मालिक और मेमसाहब के सेक्स की. आप लोग मुझे बताना जरुर, कि कैसी लगी? मेरे पास और भी कहानी है उनके सेक्स की और उनके दोस्तों के साथ सेक्स.. वो फिर कभी बताऊंगा.

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