मैं शिवानी के पड़ोस में ही रहता था और उसकी सभी हरकतों को बखूबी जानता था | मुझे पता था की वो अपने घर से ज्यादा बहार नहीं निकलती है न की उसकी कोई खास दोस्त भी है | वो ज्यादा किसी से बात ही नहीं करती थी और हमेशा अकेली ही रहा करती थी | एक दिन मैं अपनी घर की छत पे हवा खा रहा था जहाँ से उसका कमरा साफ़ दिखाई पड़ता था | मैंने देखा की वो अपने कमरे में अपनी नंगी टांगों को फेलाए चुत में लंड जैसा कोई तकड़ा सा खिलौना डालती हुई मुंह फाड़ रही थी और शायद चिल्ला भी रही जिसकी चींखें बंद खिड़कियों से मुझ तक नहीं पहुंचा |

मैं इतना उत्तेजित हो चला की बस सारा नज़ारा देखता हुआ अपने लंड को मसलता हुआ उसका नाम जब रहा था | मैं जल्दी से उसके घर गया और पता चालाकी साली अपने घर पर अकेली थी और मैं फट से अंदर घुस गया | वो मुझे देख कर हैरान रह गयी तभी मैंने खा, नहीं नहीं . . .जानेमन रुको नहीं . . मैं तो बस तुम्हे सेक्स में सहयोग देना चाहता हूँ . .!! वो शांत रही मानो उसने बिना कुछ कहे ही मुझे हमे भर दी थी | अब मैंने फटाक से उसके उप्पर चढ़ते हुए उसके चुचों को दबाता हुआ उसके होठों का रस चूसने लगा जिसपर वो भी मुझे सहयोग करने लगी | मैं भी नंगा हो गया और हम दोनों एक दूसरे से लबालब मेल खाते हुए चुसम चुसाई कर रहे थे और में बारी बारी उसके चुचों को चूसने लगा हुआ था |

मैंने अब अपने ताने हुए लंड को उसके सामने कर दिया जिसे वो किसी रंडी की तरह मुंह में भरकर चूस रही थी और कुछ देर बाद मैंने भी उसकी चुत को मसलते हुए एक दम गीली कर दिया था | अब मैंने लंड को निकाल उसकी चुत पर टिकाकर अंदर को देने लगा जिसपर वो बिलकुल किसी सच्ची रंडी की तरह अपनी चुत की फांकों रगड़ रही थी और मैंने उसकी टांग को उठाये उसकी चुत में अपने लंड को घुसाने में मग्न था | वो अब भी मुझे गाली बकती हुई जोर लगाने को खेने लगी और मैंने ताभिजोश में आते हुए सारा मुठ झड दिया |

मैं सारा कांड इतनी जल्दी कैसे खतम कर सकता था और इसीलिए मैंने २ मिनट बाद उसके चूतडों को उठाया और वहीं उसकी गुदा पर थूक को अंदर देत एहुए अपने लंड को उसकी लगाकर एक जोर का धक्का मारा जिसपर अब उसकी चींख के निकल गयी और इस बार मेरे मुंह से गाली निकल रही थी और वो ज़ोरों से चिल्ला रही थी | उसकी गांड मारने का मज़ा तो उसकी चुत से भी बेहतर था | बस अब हम दोनों को रोकने वाला कोई नहीं था और मैं एक साथ कभी अपने लंड को उसकी चुत में देता तो कभी गांड में लंड के ज़ोरों के धक्के पेलने लग जाता था | अब वो हालांकि अपने व्यक्तित्व से नहीं बदली थी पर मेरी पड़ोसन होने कारण जब भी उसका मन सेक्स करना का होता है तो मुझे ज़रूर ज्यादा कर्टलेती इसीलिए लोग मुझे कहते हैं सेक्स साहयक |